
रायगढ़:- तहसील एवं जिला रायगढ़ के ग्राम बैकुंठपुर पटवारी हल्का नंबर-47 की भूमि से जुड़े पुराने नामांतरण विवाद में अब नया कानूनी मोड़ सामने आया है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार खसरा नंबर 127/2 एवं 137/5, कुल रकबा करीब 1.468 हेक्टेयर भूमि के स्वामित्व एवं नामांतरण को लेकर लंबे समय से राजस्व स्तर पर विवाद चल रहा है।
दस्तावेजों में उल्लेख है कि उक्त भूमि के संबंध में वर्ष 1988 में अनुविभागीय दंडाधिकारी,रायगढ़ के राजस्व प्रकरण में आदेश पारित हुआ था। इसके बाद भूमि के नामांतरण एवं कब्जे से जुड़े विवाद को लेकर विभिन्न स्तरों पर कार्यवाही हुई।
2012 में नामांतरण को लेकर उठे सवाल प्रकरण से संबंधित आवेदन में आरोप लगाया गया है कि 12 मार्च 2012 को भूमि के लंबन काल के दौरान कथित रूप से उनके वारिसों की अनुमति एवं सहमति के बिना तथा हस्ताक्षर के बिना विक्रय/नामांतरण संबंधी प्रक्रिया की गई। इस मामले में बाद में राजस्व न्यायालयों में विवाद सामने आया।
दस्तावेज में यह भी उल्लेख है कि विलासपुर संभाग कमिश्नर न्यायालय के अपील प्रकरण में वर्ष 2023 में संबंधित नामांतरण को अवैध मानते हुए निरस्त किए जाने का उल्लेख किया गया है।
राजस्व मंडल में भी पहुंचा मामला✍️
मामला आगे राजस्व मंडल छत्तीसगढ़, बिलासपुर तक पहुंचा। दस्तावेजों में दर्ज कार्यवाही के अनुसार वर्ष 2026 में राजस्व मंडल के समक्ष पुनरीक्षण प्रकरण में सुनवाई हुई।
6 मई 2026 की कार्यवाही में अधिवक्ता की ओर से संबंधित उच्च न्यायालय प्रकरण की वस्तुस्थिति प्रस्तुत करने के लिए समय लिया गया। इसके बाद 5 अगस्त 2026 को हुई कार्यवाही में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के आदेश का उल्लेख करते हुए मामले को आगामी पेशी तक स्थगित रखने की स्थिति सामने आती है।
हाईकोर्ट के आदेश का भी उल्लेख✍️
राजस्व मंडल की कार्यवाही में WP/227 No-14/2026 से संबंधित उच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 25 जून 2026 का उल्लेख किया गया है। दस्तावेज के अनुसार उच्च न्यायालय में प्रस्तुत याचिका को वापस लेने की अनुमति दी गई थी और याचिका को withdrawn के रूप में निराकृत किया गया।
इसके बाद राजस्व मंडल ने उक्त आदेश को ध्यान में रखते हुए प्रकरण में आगे की कार्रवाई के लिए अगली पेशी निर्धारित करने की बात दर्ज की है।
पहचान एवं इस्तीफे को लेकर भी कार्यवाही✍️
5 अगस्त 2026 की कार्यवाही में पक्षकारों एवं अधिवक्ताओं की उपस्थिति का उल्लेख है। दस्तावेज के अनुसार अधिवक्ता द्वारा यह भी बताया गया कि उनके मध्य एक पक्ष के अधिवक्ता पद से इस्तीफा देने के कारण मामले को आगे चलाने की स्थिति नहीं रही। इसके बाद संबंधित आवेदन पर न्यायालय ने आगे की कार्रवाई के लिए स्वतंत्रता प्रदान की।
अब अगली सुनवाई पर टिकी नजर✍️
पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि विवादित भूमि के नामांतरण की वैधता, पुराने राजस्व आदेशों तथा उच्च न्यायालय में हुई कार्यवाही के बाद राजस्व मंडल आगे क्या निर्णय लेता है। फिलहाल उपलब्ध कार्यवाही पत्रों से स्पष्ट है कि प्रकरण अभी अंतिम रूप से समाप्त नहीं हुआ है और आगामी पेशी में इसकी दिशा तय होगी।



