
आशीष रंगारी
छत्तीसगढ़ प्रधान पाठक कल्याण संघ रायगढ़
👉”निजी पदीय बंधन” व ” निजी संगठन बंधन” को तिलांजलि दे,सर्व हितार्थ इस न्याय युद्ध में सभी शिक्षक संवर्ग स्वस्फूर्त हों शामिल
रायगढ़ :- “लोग कहते हैं आंदोलन प्रदर्शन और जुलूस निकालने से क्या होता है ? “इससे यह सिद्ध होता है कि,हम जीवित हैं,अटल हैं,और मैदान से हटे नहीं,ना चुके हैं। यह प्रमाण है हमारे हार न मानने वाले स्वाभिमान का। हमारा यह आंदोलन दिखाता है कि, हम अन्याय अत्याचार व किसी भी प्रकार के दमनकारी नीतियों व आदेशों से भयभीत होकर अपने लक्ष्य से हटने वाले नहीं हैं। हम ऐसे परिपाटी और व्यवस्था का अंत करना चाहते हैं जिसका आधार सत्ता का मद मनमानी व तानाशाही है”। यह कहना है रायगढ़ जिले के तमाम शिक्षक संवर्ग संगठन के पदाधिकारियों का। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन रायगढ़ के जिला संयोजक श्री शेख कलीमुल्लाह,सचिव फेडरेशन व अध्यक्ष छग शिक्षक संघ श्री अनिल यादव, छत्तीसगढ़ कर्मचारी संघ रायगढ़ अध्यक्ष श्री लक्ष्मीकांत पटेल, छत्तीसगढ़ संयुक्त शिक्षक संघ रायगढ़ अध्यक्ष श्री राज कमल पटेल, छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन अध्यक्ष रायगढ़ श्री सी.पी. डनसेना,छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ रायगढ़ श्री भोज राम पटेल, प्रांतीय अध्यक्ष छत्तीसगढ़ क्रांतिकारी शिक्षक पंचायत एलबी संघ श्री लैलूंन भारद्वाज सहित रायगढ़ जिले के शिक्षक संगठनों ने छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन की प्रस्तावित 22 अगस्त की अनिश्चितकालीन हड़ताल में अपने मान सम्मान स्वाभिमान व अस्मिता की लड़ाई के संघर्ष का बिगुल फूंक दिया है। जिले के तमाम शिक्षक संवर्ग के अध्यक्षों ने जारी अपने संयुक्त बयान में अपने अपने संगठनों के तमाम शिक्षक संवर्ग के तमाम साथियों से अपील करते हुए कहा है कि, “अपने मौलिक अधिकार,मान सम्मान,स्वभिमान,अपने पेशे व परिवार के वाजिब हक से जुड़े सर्वहित की लड़ाई में बिना किसी के बहकावे में आए,अपने निजी पदीय बंधन व संगठन बंधन को तिलांजलि देते हुए, स्वस्फूर्त होकर छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के बैनर तले 22 अगस्त से होने वाली अनिश्चितकालीन हड़ताल में शामिल हों”। जारी संयुक्त बयान में उन्होंने कहा कि,पूरे प्रदेश में 4 लाख से अधिक कर्मचारी अधिकारियों का संगठन, छतीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन का यह आंदोलन एक ऐसी परिपाटी एक ऐसी व्यवस्था के खिलाफ है जिसका आधार “सत्ता का मद, मनमानी, व तानाशाही है”
BOX 👉 आखिर हड़ताल क्यों ? एक नजर
छत्तीसगढ़ के इतिहास में यह पहला मौका है जब डीए और एचआरए जैसे अपने मौलिक अधिकारों के लिए कर्मचारी अधिकारी संगठनों को आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ा है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के आंदोलन का प्रमुख पहला मुद्दा राज्य सरकार द्वारा केंद्र के समान देय तिथि जुलाई 2019 से जुलाई 2020 तक महंगाई भत्ते को केंद्र के समान लागु ना करना है,जिससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश व नाराजगी है। केंद्रीय कर्मचारियों को फिलहाल 34% व खबरों की माने तो वर्तमान में 4% की बढ़ोतरी के साथ 38% डीए मिल रहा है जबकि, राज्य के कर्मचारियों को वर्तमान में 22% डीए मिल रहा है जो कि 1 मई 22 से प्रभावशील है। वर्तमान में 6% डीए बढ़ोतरी के आदेश में विगत 28 से 32 महीनों के एरिएर्स का भी कोई उल्लेख नहीं है और ना ही आदेश में केंद्र के समान देय तिथि का उल्लेख है। इससे राज्य के कर्मचारियों को हजारों रुपए का आर्थिक नुकसान हुआ है ,और यह आर्थिक नुकसान प्रतिमाह बदस्तूर जारी है। राज्य कर्मचारियों का दूसरा प्रमुख मुद्दा है सातवें वेतनमान अनुरूप गृह भाड़ा भत्ता। विदित हो कि, राज्य में पुराना प्रचलित एचआरए दर 10% एवं 7% है जो कि,शहर वर्गीकरण अनुसार सातवें वेतनमान में फिलहाल 18% एवं 9% है। राज्य के कर्मचारियों को सातवें वेतनमान अनुरूप एचआरए 1 जनवरी 2016 से नहीं दिया गया है। उनको आजतक छठवें वेतनमान अनुरूप ही पुरानी दर से एचआरए दिया जा रहा है, जिससे एचआरए के मामले में भी राज्य कर्मचारियों को हजारों रुपए का नुकसान प्रतिमाह हो रहा है
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जिनका कोई आंदोलन ही नहीं,वे बेवजह की लफ्फजियां न करें,और ना ही आंदोलन में शामिल हो रहे शिक्षक संवर्ग को बरगलाएं
अपने संयुक्त बयान में जिले के तमाम शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों ने जिले के समस्त शिक्षक साथियों से अपील की है कि, फेडरेशन के साथ पूरे प्रदेश में 91 मान्यता प्राप्त व गैर मान्यता प्राप्त संगठन है। ऐसे में एक या दो ऐसे अवसरवादी संगठन जो इस आंदोलन में है ही नहीं, या जिन्होंने स्वयं को इस आंदोलन से अलग कर लिया है,या जिनका कोई पूर्व नियोजित या घोषित आंदोलन ही नहीं, उनका हम खुले व विशाल हृदय से अब भी इस आंदोलन में स्वागत करते हैं किंतु,साथ यह चेतावनी भी देते हैं कि,कर्मचारियों अधिकारियों के सर्वहित की इस लड़ाई में अपनी निजी महत्वाकांक्षा,बिना कुछ किए ही श्रेय लेने व बेवजह ढिंढोरा पीटने की आदत व लफ्फाजी से बाज आएं। बेवजह की लफ्फाजियां ना करें, और ना ही अपने संगठन के शिक्षकों को फेडरेशन के इस आंदोलन में शामिल होने से रोकें। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन का 22 अगस्त का अनिश्चितकालीन आंदोलन एक पूर्वनिर्धारित पूर्वनियोजित एक चरण बद्ध आंदोलन है जो अपने वाजिब अंजाम पर जरूर पहुंचेगा





