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गृहस्थ आश्रम सबसे बड़ा तप, विवाह केवल दो देह का नहीं, दो आत्माओं का मिलन:- पूज्य बाबा प्रियदर्शी..55 जोड़ों के विवाह पर पूज्य पाद बाबा प्रियदर्शी राम जी का संदेश..

*रायगढ़ :- प्रातः स्मरणीय परमपूज्य पीठाधीश्वर गौतम राम जी के पावन अवतरण दिवस पर 55 जोड़ों के विवाह के आयोजन पर पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी ने नव-दम्पत्ति हेतु आशीर्वाद देते हुए कहा आप सभी परमपूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी की असीम कृपा प्रातः स्मरणीय परमपूज्य पीठाधीश्वर गौतम राम जी के अवतरण दिवस के पवित्र अवसर पर परिणय सूत्र में बंधे हैं। यह आयोजन उत्तर प्रदेश के वाराणसी शिवाला स्थित क्रीम कुंड अघोराचार्य बाबा कीनाराम अघोर शोध एवं सेवा संस्थान पर सादगी पूर्ण तरीके से आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ। पूज्य बाबा जी ने विवाह आयोजन के दौरान दिए संदेश में कहा यह संयोग ही परम पिता परमेश्वर का आशीर्वाद है। पूज्य बाबा जी ने कहा गृहस्थ जीवन को तप, सेवा और साधना का रूप दें। जैसे शिव-पार्वती, सीता-राम का दाम्पत्य लोक-कल्याण हेतु आदर्श बना, वैसे ही आपका जीवन भी धर्म, प्रेम व कर्तव्य का संगम बने। पति-पत्नी को दूसरे का पूरक बताते हुए पूज्य बाबा ने संदेश में कहा अहंकार का त्याग, समर्पण का भाव और परस्पर सम्मान ही सुखी दाम्पत्य के सफलता कुंजी है। सुख में साथ हँसें, दुःख में साथ तपें। एक दूसरे के दोष की बजाय गुणों को देखें। नव दंपति अपने परिवार, माता-पिता, गुरुजनों की सेवा को सदैव सर्वोपरि रखें। प्यासे को पानी, भूखे को अन्न और दुखी को सांत्वना देना ही सच्चा गृहस्थ धर्म है। आपका घर अघोरेश्वर के दया, करुणा, प्रेम का केंद्र बने। संतान को संस्कार दिए जाने के संबंध में उन्होंने कहा जब माता-पिता स्वयं धर्म-पथ पर चलेंगे, तभी संतान भी संस्कारी होगी। सुबह-शाम प्रभु स्मरण, सत्य वचन, सात्विक आहार के जरिए अपने घर को मंदिर बनाएँ। पूज्य गौतम राम जी की ओर से पूज्य प्रियदर्शी राम जी ने नव विवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए कहा आप सभी का दाम्पत्य जीवन दीर्घायु, आरोग्य, संतान, संपत्ति और यश से परिपूर्ण हो।

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