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अग्निपथ,अग्निवीर और अग्निपरीक्षा का दौर….आशा त्रिपाठी

अग्निपथ जैसा कि नाम से ही विदित है, यह आम जनमानस मे नौकरी या योजना को लेकर जो एक परंपरागत छबि बनी हुई है उससे हटकर एक अलग योजना है जिसके धरातल पर आने के पूर्व ही विरोध शुरू हो गया। कारण जो भी रहे होंगे। कुछ तो साजिश,कुछ आदतन और कुछ अज्ञानतावश।कुछ ऐसे उम्मीदवार भी रहे जिन्होंने शारीरिक दक्षता और मेडिकल फिटनेस की परीक्षा पास कर ली थी सिर्फ लिखित परीक्षा ही शेष थी जो दो साल के कोरोना काल मे संम्पन्न न हो सकी और वे उम्र की निर्धारित सीमा पार चुके हों।ऐसे युवाओं का सपना  निश्चित तौर पर टूटा होगा शायद यही सोचकर आयु सीमा दो वर्ष और बढा दी गई लेकिन राजनीतिक विरोधियों ने विरोध के नये रास्ते खोल दिए।सोशलमीडिया पर इसे लेकर घमासान मचा लेकिन  भर्ती प्रक्रिया के शुरू होते ही.निर्धारित अवधि से पूर्व ही 200000आवेदन पत्रों की प्राप्ति और उसमें निरंतर उछाल युवाओं की गंभीरता और उनके समर्थन को दर्शाता है।रही बात राजनेताओं की जो महज विरोध के नाम पर अनर्गल तर्कों को हवा दे रहे हैं जिससे यह स्पष्ट समझ आता है कि वे युवाओं के भविष्य की चिन्ता कम और विरोध की राजनीति अधिक कर रहे हैं।अगर विरोध है, तो बेहतर मास्टर प्लान रखें केंद्र से बातचीत कर उसे सुलझाऐं और आपसी टकराव की बजाए समन्वय के बेहतर रास्ते अपनाऐं।युवा देश का भविष्य होता है उसे दंगे फसाद की बजाय संतुष्ट करें कि आवश्यकतानुसार इस योजना मे भी सुधार की संभावनाएं है।यह महज एक शुरुआत है।अपने नाम के अनुरूप यह योजना अग्निवीर ही तैयार करेगी।चार साल की कठोर ट्रेनिंग यदि एक युवा को काबिल अफसर बना कर देश सेवा का अवसर प्रदान करती है तो जवान क्यों नहीं।शंका कुशंका का प्रश्न ही नही उठता।गौरतलब यह है कि आप पर कोई जबरदस्ती नहीं।आपके सामने सैकड़ो विकल्प है और उदाहरण भी कि कैसे गरीबी और तमाम विपरीत परिस्थितियों से जूझने के बावजूद भी ईन्सान अपने लक्ष्य टक पहुंचनते हैं। UPSC,IIT,JEE,PMT,PET,PAT etc etc…. पर ऐसे निम्न मध्यमवर्गीय कहाँ जाऐं जिनकी आमदनी बेटे के जवान होने तक हांफने सी लगती है और एक सहारे की उम्मीद उनके आँखों मे झिलमिलाते लगती है।उनके लिए अग्निवीर एक आशा की किरण है।दरअसल असंतोष का एक मुद्दा जो है वह पेन्शन और अन्य सुविधाओं को लेकर भी है जो सेवानिवृत्त होने के पश्चात भी जारी रहती हैऔर उसे लेकर जो असंतोष है वह स्वाभाविक सा लगता है।ऐसी स्थिति मे और भी,  जब शीर्ष पर बैठे योजनाकार इस पूरे संदर्भ मे अपनी गिरेबान मे देखे तो वहां एक दिन भी विधायक या सांसद रहने वाले को ढेर सारी सुविधाओं के अलावे आजीवन पेंशन भी दिया जाता है।अग्निपथ को लेकर विरोध करनेवाले राजनेता इस मुद्दे पर चुप क्यों है?देशसेवा के लिए कुरबानी देने अग्रिम पंक्ति मे खडे इन बलिदानियों के बलिदान के बाद भी उन्हें देय अनुग्रह राशि तथा अन्य रीलिफ मे अलग अलग राज्यों मे असमानता है।बेशक इस दौरान कुछ नेताओं पेशंन छोडने की इच्छा भी जाहिर की थी पर उनकी आवाज नक्कारखाने मे तूती की तरह रह गई।अग्निपथ अग्निवीर की भरती के साथ साथ सियासी गलियारों मे राजनितिज्ञों की अग्निपरीक्षा भी है।                         

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