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चक्रधरनगर चौक में 37 वें दुर्गोत्सव का शुभारंभ…15 साल बाद आए शुभ मुहूर्त में मां होंगी विराजमान….ढाई लाख लोगों की आस्था का केंद्र बनी चक्रधर नगर की मां की कुटिया

रायगढ़/मंगलवार को दुर्गा षष्ठी की पूजा के साथ ही चक्रधरनगर चौक में 37वें दुर्गा पूजन उत्सव की शुरुआत हो गई। रायगढ़ के सबसे पुराने और सबसे बड़े सार्वजनिक दुर्गा पूजन उत्सव में चक्रधर नगर क्षेत्र के करीब ढाई लाख लोग जुड़े हैं। 4 दिन तक चलने वाले इस उत्सव में आयोजन समिति द्वारा विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस बार दुर्गा पंडाल को कुटिया की थीम पर बनाया गया है। जहां देवी दुर्गा की प्रतिमा को सप्तमी की रात और अष्टमी के भोर में कोलकाता से आए पुरोहितों द्वारा विधि विधान से स्थापित किया जाएगा। 3 दिनों तक विधि-विधान से पूजन के बाद चौथे दिन यानी दशहरा के अगले दिन माता दुर्गा की प्रतिमा को विसर्जित कर दिया जाएगा। दुर्गोत्सव के दौरान चक्रधरनगर क्षेत्र में लाखों भक्तों की भीड़ होती है। दूर-दूर से लोग दुर्गा पंडाल देखने आते हैं। बीते 36 साल से यह आयोजन हो रहा है। पहले दुर्गा पंडाल वर्तमान के दुर्गा चौक में ही लगाया जाता था फिर ट्रैफिक बढ़ने के कारण इसे चक्रधरनगर चौराहे में बैठाया जाने लगा।

चक्रधरनगर दुर्गोत्सव समिति के अध्यक्ष शरद महापात्रे ने बताया कि चक्रधरनगर चौक की माता दुर्गा पंडाल में कम-से-कम 10 मोहल्ले आते हैं और इनमें करीब ढाई लाख लोग रहते हैं। हम सब मिलकर यह आयोजन करते हैं। हमारे यहां के युवा शांतिप्रिय तरीके से सभी धार्मिक आयोजनों में हिस्सा लेते हैं। इस बार पंडाल के सामने बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले, ट्रांपोलिन इत्यादि की निशुल्क व्यवस्था की गई है ताकि वे उत्सव का आनंद ले सकें।
चक्रधर दुर्गोत्सव समिति के विवेक रंजन सिन्हा, कौशलेष मिश्रा और पंकज कंकरवाल संरक्षक हैं। अध्यक्ष शरद शरद महापात्रे, उपाध्यक्ष अरुण उपाध्याय, सचिव रोशन चंद्रा , सह सचिव प्रदीप महापात्रे,सह सचिव मनीष, शर्मा कोषाध्यक्ष सुशील गुप्ता रवि महापात्रे, भानु महापात्रे, सौरभ थवाईत,बल्ला मिश्रा,ओम प्रकाश महिलाने, शैलेश सराफ, जयराज केसरवानी,बंटी वैष्णव,राहुल लांबट, पृथ्वी कंकरवाल,बाबू कंकरवाल,विकास गुप्ता, अभिलाष गुप्ता, छोटू महापात्रे, संतोष देवांगन, सोमनाथ बरेट, बिरजू साहू ने लोगों से इस उत्सव में आने का आग्रह किया है।

रामलीला और रावण दहन का भी आयोजन
चक्रधर नगर दुर्गोत्सव में मां की प्रतिमा स्थापित होने के साथ रामलीला मंचन भी किया जाएगा। रामलीला अब चक्रधरनगर दुर्गोत्सव की पहचान बन गई है। यह रामलीला सिर्फ 4 दिनों की होती है जिसमें रामायण के मुख्य विवरणों को स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। इसे देखने के लिए गांव-गांव से लोग आते हैं और कई दफे यह देर रात तक चलती है। रामलीला में स्थानीयता का भाव और पुट दोनों समाहित होता है जिसे लोग काफी पसंद करते हैं। इस बार भी रामलीला के आखिरी दिन यानी दशहरा के दिन यहीं से प्रभु श्रीराम की भव्य शोभायात्रा निकलेगी जो चक्रधरनगर के मुख्य मार्ग-मोहल्ले से होते हुए शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी स्टेडियम तक जाएगी जहां फिर रावण दहन का कार्यक्रम होगा।

15 साल बाद आया शुभ मुहूर्त
कोलकाता से पूजा कराने आए पुरोहित पंडित तारक शास्त्री ने बताया कि इस बार षष्टी के साथ सप्तमी और सप्तमी के दिन अष्टमी लग रही है जो की बहुत शुभ मुहूर्त होता है। यह मुहूर्त 15 साल बाद आया है। सुख समृद्धि लाने वाले इस मुहूर्त के अनुसार देवी की प्रतिमा की स्थापना भोर में होती है जिसकी पूजा देर रात शुरू होती है। पूजा के महत्व के बारे में उन्होंने बताया कि माता की पूजा बंगाली संस्कृति और रीति रिवाज से होती है। दल में लोगों द्वारा धुनुची नाच और ढोल की विशेष थाप से माता प्रसन्न होती है। माता चंडी अपने भक्तों पर कृपा करती हैं।

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