
रायगढ़..शहर में बीते कुछ सालों से कई बदनामशुदा होटलों में निजी पल बिताने के लिए प्रति घंटों के हिसाब से कमरे उपलब्ध कराए जा रहे हैं।ऐसे होटलों की तादाद में अचानक से इज़ाफ़ा हुआ है।दरअसल बताया जा रहा है कि दो बालिग लोग एक साथ एक कमरे में वैध आईडी के जरिए ठहर सकते हैं।एक साथ ठहरने में कोई भी कानूनी बाधा आड़े नहीं आती है।और इसी बात का फायदा उठाकर शहर के कई बदनामशुदा होटल प्रति घंटों के हिसाब से रूम देकर लाखों रुपए कमा रहे हैं।
होटल व्हाइट रोज की चर्चा जोरो पर,मोहल्लेवासी कर रहे विरोध..
कोतरा रोड में संचालित होटल व्हाइट रोज का बीते कुछ समय से जमकर विरोध आसपास के लोग कर रहे हैं।वहां रहने वाले लोगों का कहना है कि होटल बिना किसी भी वैध लाइसेंस के संचालित हो रहा है। और होटल में नाबालिग लड़कियां और अन्य लड़कियां भी अपने मेल पार्टनर के साथ इस होटल में समय बिताने के लिए आती हैं।जिस वजह से वहां असामाजिक तत्वों का आना जाना लगा रहता है।और यहां रोजाना शराबखोरी भी बिगडैल किस्म के लोगों के द्वारा की जाती है।जिस वजह से यहां का माहौल खराब होता जा रहा है।

एसएसपी शशिमोहन सिंह से की गई शिकायत में लगाए गए गंभीर आरोप..
बुधवार को मोहल्लेवासियों ने एसएसपी शशिमोहन सिंह को भी इस होटल में संचालित अवैध गतिविधियों की लिखित शिकायत की है।शिकायत में होटल संचालक पर गम्भीर आरोप लगाये गए हैं।होटल में नाबालिक लड़कियों की आवाजाही के अलावा होटल संचालक और उसके गुर्गों द्वारा मोहल्ले के ही अरुण गुरुजी के साथ दो दिन पहले की गई मारपीट का हवाला देते हुए ssp से दरख्वास्त किया गया है कि इस होटल की अवैध गतिविधियों की जांच कर,अरुण गुरुजी के ऊपर किए गए जानलेवा हमले के आरोपियों पर मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए।

बिना आईडी के भी रूम देने के लगे आरोप…
होटल व्हाइट रोज प्रबंधन पर बिना आईडी प्रूफ के भी रूम देने के संगीन आरोप लगे हैं।सूत्रों की माने तो नाबालिग बच्चों और पहचान छुपाकर यहां आने वाले ग्राहकों को पांच सौ से एक हजार रुपए ज्यादा लेकर भी रूम दिया जाता है।एक कस्टमर ने तो बकायदा इस बात का दावा भी किया है
बहरहाल जायज और नाजायज अपनी जगह है लेकिन शहर में संचालित कई होटल घंटों के हिसाब से निजी पल बिताने के लिए रूम दे रहे हैं और अनैतिक रूप से होटल संचालित कर रहे हैं।और कानून को ही कानून का पाठ पढ़ाकर नैतिकता की बात कर रहे हैं।लेकिन ये होटल संचालक भूल रहे हैं कि कानून के दायरे में रहकर भी ये काम तो नीचता का ही कर रहे हैं।और कच्ची उम्र के बच्चों को गर्त का रास्ता दिखाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं



