
*1. यदि परिवहन विभाग (RTO) के अभिलेखों में वाहन विक्रेता क्रेता के पक्ष में *हस्तांतरण* नहीं करता है तो भी वह विक्रय अमान्य *नहीं* माना जाएगा। वाहन का स्वामी वही माना जाएगा जिसके आधिपत्य में वर्तमान में वह वाहन है।2. यदि नए स्वामी के नाम पर वाहन का पंजीयन नहीं भी कराया गया है तो भी वह अमान्य नहीं होगा जबकि मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार पंजीयन का हस्तांतरण आवश्यक बताया गया है ।3. माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्णय के अनुसार वाहन एक *वस्तु* ( *goods* ) है, जिसकी बिक्री M. V. Act के तहत तय /cover नहीं होगा, अपितु यह *sale* *of* *goods* *act* , 1930 के अंतर्गत आएगा।
विक्रय की प्रक्रिया तभी पूर्ण हो जाती है जब विक्रेता विक्रय उपरांत सम्पूर्ण राशि प्राप्त कर उसका भौतिक हस्तांतरण कर देता है तथा sale letter में हस्ताक्षर कर फार्म 29-30 भरने की औपचारिकता संपन्न कर देता है। इतनी औपचारिकता मात्र से ही sale proceeds की प्रक्रिया पूर्ण हो जाती है। तत्पश्चात विक्रेता उसका स्वामी नहीं कहलाएगा। 4.जहां तक वाहन का रजिस्ट्रेशन करवाने वाली बात है, वह बाद की प्रक्रिया है, जो विक्रय का हिस्सा नहीं है। 5.संबंधित अभिलेखों में नाम का चढ़ाना व बिक्री अलग अलग प्रक्रिया है। 6.माननीय सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के आधार पर उस विक्रेता को रिकार्ड में नाम नहीं बदलवाने के कारण उसे परेशान नहीं किया जा सकता है। टीप : यह लेख ज्ञानवर्धन मात्र के लिए जारी किया गया है। तथापि, विभिन्न परिस्थिति में विधिक सलाह लेना श्रेयस्कर होगा।



