

रायगढ़। शहर के राजप्रिय हॉस्पिटल में पहली बार एक अत्यंत जटिल एवं उच्च जोखिम वाली यूरोलॉजिकल सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की गई। इस सर्जरी का नेतृत्व प्रसिद्ध यूरोलॉजिस्ट, एंड्रोलॉजिस्ट एवं रोबोटिक सर्जन डॉ. के.डी. खरे ने किया।
डॉ. खरे ने बताया कि मरीज लंबे समय से पेशाब में रुकावट, तीव्र दर्द, अधूरा मूत्र त्याग एवं बार-बार पेशाब आने जैसी समस्याओं से परेशान था। जांच में पाया गया कि मरीज की बाईं किडनी सामान्य स्थान पर न होकर पेल्विक (Ectopic) स्थिति में थी, जो एक जटिल जन्मजात स्थिति है।
सीटी स्कैन में किडनी में पथरी (कैलकुलस) स्पष्ट रूप से दिखाई दी, जो मूत्र प्रवाह में अवरोध और दर्द का मुख्य कारण थी। इस प्रकार की स्थिति में किडनी के आसपास आंत एवं अन्य महत्वपूर्ण संरचनाएं असामान्य रूप से स्थित रहती हैं, जिससे सर्जरी का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
इसके अलावा मरीज को प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने (BPH) की समस्या भी थी, जिससे मूत्रमार्ग में अतिरिक्त रुकावट हो रही थी। मरीज एवं परिजन एक ही बार में संपूर्ण उपचार चाहते थे।

डॉ. खरे के अनुसार, सर्जरी के दौरान C-Arm तकनीक से पथरी की सटीक स्थिति ज्ञात की गई। इसके बाद लैप्रोस्कोपिक तकनीक द्वारा आंत को सुरक्षित हटाकर किडनी तक पहुंच बनाई गई। किडनी की पेल्विस में छोटा चीरा लगाकर पथरी निकाली गई, जिसे पायलोलिथोटॉमी कहा जाता है।
इसी प्रक्रिया के दौरान मोनोपोलर TURP तकनीक से प्रोस्टेट की समस्या का भी सफल उपचार किया गया।
सर्जरी के बाद मरीज के शरीर पर केवल छोटे-छोटे चीरे (keyhole surgery) दिखाई देते हैं, जो आधुनिक मिनिमली इनवेसिव तकनीक का उदाहरण है। मरीज अब पूर्णतः स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुका है।
डॉ. खरे ने बताया कि इस प्रकार की जटिल सर्जरी में शारीरिक संरचना सामान्य नहीं होती, इसलिए प्रत्येक चरण अत्यंत सावधानी और सटीक योजना के साथ किया जाता है। आधुनिक तकनीक और अनुभवी टीम के सहयोग से ही ऐसे ऑपरेशन सुरक्षित रूप से संभव हो पाते हैं।
मरीज एवं उनके परिजनों ने सफल उपचार के लिए डॉ. के.डी. खरे एवं अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. आर.के. शर्मा का आभार व्यक्त किया।
राजप्रिय हॉस्पिटल, रायगढ़ का एक आधुनिक मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल है, यहां अत्याधुनिक तकनीक एवं अनुभवी चिकित्सकों की टीम द्वारा जटिल सर्जरी अब स्थानीय स्तर पर ही सफलतापूर्वक की जा रही है।





