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रायगढ़ में औद्योगिक प्रदूषण पर फूटा कांग्रेस का गुस्सा प्रदूषण फैलाने वाले प्लांट बंद करने की मांग….जिला अध्यक्ष शाखा यादव बोले जिंदगी से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, प्रदूषण और सुरक्षा में लापरवाही करने वाले उद्योगों पर तत्काल कड़ी कार्रवाई हो…..

रायगढ़। जिले में बढ़ते औद्योगिक प्रदूषण, फ्लाई एश डंपिंग और श्रमिक सुरक्षा की अनदेखी को लेकर कांग्रेस ने अब खुलकर मोर्चा खोल दिया है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष शाखा यादव ने टीआरएन, व्हीएस इस्पात, सुनील इस्पात, शिव शक्ति, सिंघल इंटरप्राइजेज, शारदा एनर्जी, सालासर जैसे उद्योगों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ये कंपनियां स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य, पर्यावरण और रोजगार के अधिकारों से खिलवाड़ कर रही हैं।शाखा यादव ने तीखे शब्दों में कहा कि जिले के उद्योगों में स्थानीय युवाओं की अनदेखी कर बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है जो न केवल सामाजिक असंतुलन पैदा कर रहा है बल्कि स्थानीय स्तर पर बेरोजगारी की समस्या को भी बढ़ा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि फ्लाई एश का जहां तहां खुलेआम डंपिंग किया जा रहा है जिसके डस्ट से आमजन का जीना दूभर हो गया है। उन्होंने कहा कि आज हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि जिले में कैंसर, लंग्स इंफेक्शन और त्वचा रोग जैसी गंभीर बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। रायगढ़ में कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टरों की आमद रफ्त से इस बात का संकेत है कि स्थिति कितनी चिंताजनक हो चुकी है। पेड़-पौधों तक पर काले धूल की मोटी परत जम गई है, जिससे उनका विकास रुक गया है और पर्यावरण का संतुलन बिगड़ चुका है।कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रशासन और संबंधित विभागों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पर्यावरण विभाग और औद्योगिक सुरक्षा विभाग की कमजोर पकड़ के कारण उद्योग मनमानी कर रहे हैं। कई स्थानों पर ईएसपी मशीनें बंद कर जहरीला धुआं छोड़ा जा रहा है, जिससे हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर को पार कर चुकी है। वहीं सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते आए दिन हादसों में श्रमिकों की मौत हो रही है।शाखा यादव ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि शिव शक्ति, सिंघल, सालासर, टी आर एन और शारडा जैसे प्लांटों को तत्काल प्रभाव से बंद कर उनकी निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने मांग की कि जब तक ये उद्योग प्रदूषण नियंत्रण और श्रमिक सुरक्षा के पूरे इंतजाम नहीं कर लेते, तब तक उन्हें संचालन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि फ्लाई एश उत्पन्न करने वाले उद्योगों को पहले उसके वैज्ञानिक और सुरक्षित निपटान की पूरी व्यवस्था करनी होगी, तभी उन्हें चलने की अनुमति दी जाए। साथ ही भूजल का अंधाधुंध दोहन करने वाले उद्योगों पर तत्काल कार्रवाई हो और केवल सतही जल के लिए वैध अनुबंध और व्यवस्थाओं के बाद ही संचालन की इजाजत दी जाए।इसके अलावा उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि श्रमिकों के अधिकारों का भी खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। ठेका प्रथा के अंतर्गत कार्यरत मजदूरों को न तो समुचित मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और न ही ईपीएफ जैसी वैधानिक राशि का नियमित भुगतान किया जाता है। श्रम कानूनों की अनदेखी करते हुए श्रमिकों का उद्योगों में शोषण जारी है, जिससे उनके समाने उनकी सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा पर गंभीर संकट खड़ा होता है। श्रम विभाग के अधिकारी इन उद्योगों में श्रम कानून के तहत मिलने वाले लाभ और सुरक्षा को लेकर जो प्रावधान है उसकी उद्योगों में निरीक्षण और जांच उपरांत पालन न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करे और श्रम कानून के तहत मिलने वाली योजनाओं के लाभ का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन कराया जाए। श्रम विभाग यदि उद्योगों में निष्पक्ष जांच करें तो अनेक गंभीर अनियमितताएं उजागर हो सकती हैं।

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