
रायगढ़ :- छत्तीसगढ़ प्रदेश में विकास और सुशासन के बड़े-बड़े दावों की पोल यहां की बदहाल और जर्जर सड़कें खोल रही हैं। बारिश के इस मौसम में सड़कों की दुर्दशा ने आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। प्रदेशभर में सड़कों की इस खस्ताहाल स्थिति और प्रशासनिक महकमे की घोर लापरवाही को लेकर स्वास्तिक मजदूर सेवा समिति के जिलाध्यक्ष पिंटू सिंह का गुस्सा फूट पड़ा है। उन्होंने राज्य सरकार और विशेषकर लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए तीखा प्रहार किया है। पिंटू सिंह ने शासन-प्रशासन को आईना दिखाते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा है कि आज प्रदेश की जनता सुरक्षित सड़कों पर नहीं, बल्कि जानलेवा गड्ढों पर चलने को मजबूर है।स्वास्तिक मजदूर सेवा समिति के जिलाध्यक्ष ने अपनी गहरी चिंता और आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य के लगभग सभी जिलों में मुख्य मार्गों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक की सड़कों का ढांचा पूरी तरह से चरमरा गया है। मानसूनी बारिश ने इन सड़कों की सूरत इस कदर बिगाड़ दी है कि अब यह पहचानना मुश्किल हो गया है कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों के बीच सड़क बची है। जगह-जगह बने विशाल और जलभराव वाले गड्ढे हर दिन किसी न किसी बड़ी और जानलेवा दुर्घटना को सीधा आमंत्रण दे रहे हैं।

इन जर्जर मार्गों पर आवागमन करना अब किसी दुःस्वप्न से कम नहीं रह गया है। पिंटू सिंह ने बेहद गंभीर लहजे में कहा कि इस अघोषित आपदा का सबसे खौफनाक और सीधा असर उन गरीबों, दिहाड़ी मजदूरों, अन्नदाता किसानों, स्कूली छात्रों और रोजमर्रा के कामकाजी तबके पर पड़ रहा है, जिनका जीवन और आजीविका हर दिन इन्हीं रास्तों से होकर गुजरती है।प्रशासनिक उदासीनता और सरकारी तंत्र की विफलता पर कड़ा प्रहार करते हुए पिंटू सिंह ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के मंत्री और समूचे महकमे को आड़े हाथों लिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में विकास के नाम पर केवल खोखले दावे किए जा रहे हैं, जबकि धरातल पर सच्चाई भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की भेंट चढ़ चुकी है। करोड़ों रुपये के भारी-भरकम बजट पास होने के बावजूद सड़कों का चंद महीनों की बारिश में ही उखड़ जाना, निर्माण कार्यों में बरती गई भारी गुणवत्ताहीनता और विभागीय भ्रष्टाचार की ओर सीधा इशारा करता है। उन्होंने सरकार से सीधा सवाल उठाया कि आखिर जनता की गाढ़ी कमाई और टैक्स के पैसे को ठेकेदारों और भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से कब तक इस तरह पानी में बहाया जाता रहेगा?इस अति-गंभीर जनसमस्या को लेकर पिंटू सिंह ने राज्य के लोक निर्माण मंत्री से तत्काल हस्तक्षेप करने की पुरजोर मांग की है। उन्होंने कड़े शब्दों में मांग रखते हुए कहा है कि सरकार अपनी कुंभकर्णी नींद से जागे और युद्धस्तर पर पूरे प्रदेश की जर्जर सड़कों की मरम्मत का कार्य अविलंब शुरू करवाए। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी मांग की है कि हाल के वर्षों में हुए सभी सड़क निर्माण कार्यों और उनके टेंडर की एक उच्च स्तरीय तथा निष्पक्ष जांच कराई जाए। इस जांच प्रक्रिया में जो भी विभागीय अधिकारी, इंजीनियर या ठेकेदार सड़कों की इस दुर्दशा के लिए दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ केवल कागजी खानापूर्ति नहीं, बल्कि ऐसी सख्त और दंडात्मक कार्रवाई की जाए जो भविष्य के लिए एक नजीर बन सके।अपने बयान के अंत में, जिलाध्यक्ष पिंटू सिंह ने सरकार को आगाह करते हुए कहा कि सुरक्षित और सुगम यातायात हर एक नागरिक का बुनियादी अधिकार है, जिसे कोई भी लोककल्याणकारी सरकार नजरअंदाज नहीं कर सकती। यदि समय रहते इन जानलेवा सड़कों की स्थिति नहीं सुधारी गई और जनता को इस नारकीय पीड़ा से मुक्ति नहीं दिलाई गई, तो आने वाले समय में आम जनता के भारी असंतोष का खामियाजा सत्ताधीशों को भुगतना पड़ेगा। सरकार को अब बयानबाजी छोड़कर जमीनी स्तर पर प्राथमिकता के साथ ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि बारिश के इस कहर और प्रशासनिक नाकामी की दोहरी मार से जूझ रही बेहाल जनता को वास्तविक राहत मिल सके।



