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सत्य का साथ हर मनुष्य का कर्तव्य :- रितेश्वर महाराज…रितेश्वर महाराज की मौजूदगी में सेवा कुंज में बही भक्ति रस की बयार

रायगढ़ :- परम पूज्य श्रद्धेय सद्गुरु श्री रितेश्वर जी महाराज का रायगढ़ आगमन पर भक्तो श्रद्धालुओं द्वारा गाजा बाजा ढोल के साथ भव्य स्वागत किया गया।
सेवा कुंज में रितेश्वर महाराज के श्री मुख से भक्ति रस की ऐसी बयार बही कि मौजूद भक्त गण मंत्र मुग्ध होकर भक्ति रस में डूब गए। विदित हो कि रितेश्वर महाराज सनातन धर्म के प्रबल प्रवर्तक है। इन दिनों सनातन धर्म के प्रसार प्रचार को लेकर वे छत्तीसगढ प्रवास पर है। शिवरी नारायण से रायगढ़ आगमन पर उनका भावभीना स्वागत करते हुए सुनील लेंध्रा के निवास के निकट स्थित सेवा कुंज ले जाया गया। वहां उन्होंने व्यक्ति उत्थान लिए अध्यात्म से जुड़े जीवन के रहस्यों पर प्रकाश डाला। रायगढ़ की आम जनता को दिए संदेश मे उन्होंने कहा कि वे पूरे देश मे सनातन संस्कृति को अलख जगाने निकले है।

राजनैतिक दल कोई विषय नही है।हर देशवासी को सनातन संस्कृति के प्रति जागरूक होना चाहिए।पुरातन समय से लड़ाई हमेशा चलती रही लेकिन सनातन संस्कृति सदा से अक्षुण है। शिबरी नारायण सड़क मार्ग से रायगढ़ आने का वाले रितेश्वर महाराज का दर्शन पाने भक्त गण रायगढ़ सहित छग के साथ आस पास जांजगीर चांपा बिलासपुर जिले से भी आए थे।सेवा कुंज में उद्बबोधन के पहले इनका भावभीना स्वागत सुनील लेंध्रा सीबी शर्मा,सुरेश गोयल ओम अग्रवाल, पूनम अग्रवाल एवम डीएन सिंह द्वारा किया।व्यक्ति का जीवन कैसा होना चाहिए इस पर महाराज रितेश्वर ने प्रकाश डाला। महाभारत में दुर्योधन और कर्ण का उदाहरण देते हुए आम जनमानस को बताया साथ देने के पहले सत्य असत्य को जानना आवश्यक है। कर्ण का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि कर्ण सामर्थ्य वान रहा लेकिन गलत के साथ की वजह से उसका दुखद अन्त हुआ । लोगो से आह्वान करते हुए महाराज ने सुबह शाम रामचरितमानस के दोहे का स्मरण करने का कर बद्ध आग्रह किया। सुबह उठते के साथ ही मोबाइल देखने की आदत को सबसे खतरनाक बिमारी बताते हुए कहा इस बिमारी की वजह से सुबह की ईश्वर आराधना प्रभावित हुई है इसके अलावा आध्यामिक आराधना का कार्य भी बाधित हुआ है। सुबह का समय ईश्वर आराधना के लिए होता है लेकिन इसकी बजाय आज की युवा पीढ़ी मोबाइल अधिक देखती है। हार मानने की बजाय संघर्ष करने की सलाह देते हुए कहा सोना को गलाने से ही उसका खोट निकलता है। सनातन का विरोध करने वालों पर भी रितेश्वर महाराज ने तीखी टिप्पणी की। सनातन की रक्षा करने वालो के साथ हमें पूरी ताकत एवम श्रद्धा से खड़ा होना चाहिए। स्पष्ट संदेश देते हुए कहा जो राम का नहीं है, वह किसी काम का नहीं है राम कृष्ण के जीवन भी कष्टों से भरा रहा। भगवान राम ने सिंहासन का त्याग करते हुए पिता के वचनों की पूर्ति के लिए वनवास स्वीकार किए इसलिए वे मर्यादा पुरुषोत्तम राम कहलाए। भगवान कृष्ण का जीवन भी कांटो से भरा रहा लेकिन उन्होंने कभी ही मुस्कुराना नही छोड़ा। सबसे बड़े युद्ध में मुट्ठी भर लोगो के सारथी बनकर हजारों सामर्थ्यवान लोगो का सामना कर युद्ध जीता। यदि बांसुरी वाले को मालूम होता कि बांसुरी बजाने से दुष्ट व्यक्ति मान जायेंगे तो वे युद्ध नही होने देते उन्होंने बुरी शक्तियों को हराने के लिए युद्ध को स्वीकार किया। आज युद्ध की आवश्यकता नहीं बल्कि सनातन धर्म विरोधी ताकतों के खिलाफ हमे मतदान करना है। रायगढ़ में रविवार की शाम कथा प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा यह व्यासपीठ राजनीति की कुर्सी नहीं है । यह पीठ इंसान को सही जीवन का सही मार्ग दिखा सकती है। दुनिया को ख़तम करने के लिए परमाणु बम बनाए जा रहे है लेकिन आदमी को जीवन देने की कोई प्रक्रिया तलाश नही की जा सकी। ऐसा कोई साइंस नही है जो मनुष्य को जीवन दे सके। सभी से सनातन धर्म की रक्षा का आह्वान करते हुए कहा मानव कल्याण के जरिए समाज कल्याण हमारा कर्तव्य है।

सुनील लेंध्रा के निवास मे शिष्यों को दिया आशीर्वाद

सेवा कुंज में प्रवचन पूरा होने के बाद महाराज रितेश्वर सेवा कुंज के निकट स्थित सुनील लेंध्रा के निवास गए और शिष्यों को स्नेहपूर्वक प्रसाद स्वरूप आशीर्वाद दिया।

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