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भगवान राम के आदर्शो के अनुकरण से दूर होगी समाज की कुरीतियां :- बाबा प्रियदर्शीराम….श्री राम के जीवन में आदर्श पुत्र, आदर्श भाई के साथ आदर्श मित्र की झलक…बहिष्कृत उपेक्षित नारियों के उत्थान के हेतु आगे आने प्रियदर्शी राम ने किया आह्वान

रायगढ़ :- जुटमील स्थित बाझिन पाली में आयोजित दस दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा यज्ञ महोत्सव के आयोजन में अघोर गुरु पीठ बनोरा के पीठाधीश्वर बाबा प्रियदर्शी राम ने कहा भगवान राम के आदर्शो के अनुकरण समाज में व्याप्त कुरीतियां दूर होंगी l आयोजन के सातवे दिन संत प्रियदर्शी राम के चरण श्री वचनों से राम कथा का वाचन हुआ l उन्होंने भगवान श्रीराम के मनुष्य अवतार में मौजूद आदर्श जीवन की झलक का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान राम का जीवन आज भी भारतीय समाज के लिए प्रासंगिक है l मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में भगवान राम ने एक आदर्श पुत्र, आदर्श भाई और आदर्श मित्र का मिथक स्थापित किया l भगवान राम की कथा का श्रवण एवं उसके अनुकरण से मानव जीवन में बदलाव आ सकता है l आज ऐसे युग में जी रहे है जहां सत्ता पाने के लिए आपसी संघर्ष बढ़ा है l पिता-पुत्र, पड़ोसियों में आपसी ईर्ष्या द्वेष बढ़ा है l आपसी भाईचारे में कमी आई है l भगवान राम की कथा मलिन बुद्धि को हरती है l हमारे धर्म शास्त्रों के अनुसार भगवान राम के स्मरण मात्र से दुखो के भवसागर से पार लग सकता है l बाबा प्रियदर्शी ने जीवन में अच्छे आचरण अपनाने की आवश्यकता भी जताई l राम के आदर्शो का उल्लेख करते हुए कहा पिता के वचनों के पालन के लिए राज पाठ का परित्याग कर चौदह वर्षो का वनवास स्वीकार किया l असुरी शक्तियों के संहार एवम संतो की रक्षा हेतु भगवान राम का जन्म हुआ था l असुर राज रावण को भगवान ब्रह्मा से यह वरदान प्राप्त था कि मनुष्य एवम वानरों को छोड़कर उसे कोई नही मार सकता l

मनुष्य एवं वानरों को रावण तुच्छ मानता था lवनवास के समय श्रीराम ने सुग्रीव से मित्रता करते हुए सीता खोज के कार्य का परित्याग किया l और बाली से युद्ध किया l मित्रो के सरसो समान दुःख को पहाड़ की तरह एवं अपने पहाड़ समान दुःख को सरसो की तरह समझने की सलाह देते हुए बाबा प्रियदर्शी राम ने कहा जाति पाती को देखे बिना प्रभु राम ने केवट को गले लगाया l सनातन युग से चली आ रही परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कोई कन्या या विवाहिता किसी कारण वश पद चिन्ह से विचलित हो जाती है तो समाज द्वारा उसे सुधरने का भी अवसर देना चाहिए l समाज में व्याप्त कुरुतियों की वजह से उन्हें आजीवन आजीवन निंदा उपेक्षा एवम बहिष्कार का सामना करना पड़ता है l स्त्रियों के लिए ऐसी परंपरा प्रभु श्रीराम के समय से चली आ रही l इंद्र ने छलवश
अहिल्या का स्त्रीत्व नष्ट किया लेकिन ऋषि गौतम का कोप भाजन का शिकार होना पड़ा l ऋषि श्राप के कारण वे पत्थर की बन गई। श्रीराम प्रभु की महानता को बताते हुए कहा की भगवान राम ने पाषाण बनी अहिल्या का चरण स्पर्श कर पुनर्जीवित करते हुए उपेक्षित अहिल्या का उद्धार कर समाज में भद्र नारी के रूप में सम्मान दिलाया । आज ऐसे अनेकों उदाहरण है कि महिलाए उपेक्षित है l उन्हे समाज में सम्मान जनक स्थान देने वाले युवकों की कमी है l भगवान राम के आदर्शो को मानकर उपेक्षित नारियों के हक के लिए समाज की आगे आना चाहिए l प्रभु श्रीराम ने माता सीता के रक्षा के लिए रावण से युद्ध किया l उससे भी बड़ी महत्वपूर्ण बात यह है कि उपेक्षित बहिष्कृत नारी को समाज में सम्मान जनक स्थान दिलाया l असुरो के अत्याचार से पीड़ित साधुओ को संगठित कर उनके अगुवाई की और विजय दिलाई l प्रभु श्रीराम की जितना भी गुणगान किया जाए कम ही है l आज की पीढ़ी को मोह माया से ग्रस्त बताते हुए कहा मोह माया का परित्याग कोई नही करना चाहता l आज गद्दी को लेकर खून खराबे की स्थिति है जबकि भगवान राम और भरत दोनो भाईयो ने गद्दी का परित्याग किया l राम भारत के भाई प्रेम को सबसे अनूठा बताते हुए बाबा प्रियदर्शी ने कहा भरत ने भाई की चरण पादुका को गद्दी पर रखा और राम के आग्रह पर व्यवस्थापक की तरह राजपाट को संभाला l ऐसी मिशाल आज नही देखने मिलती l संपति को प्रभु की संपति मानकर व्यवस्थापक की तरह देखभाल करे तो अपने आने वाले पीडियो के लिए धन अर्जित करना सार्थक होगा I

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