Uncategorized

सुप्रीम कोर्ट में पुलिस के फर्जी मामलों की गूंज, गृह सचिव को जवाब देने किया तलब….सुप्रीम कोर्ट ने लगाई गिरफ्तारी पर रोक, थाना तमनार का मामला


रायगढ़ :- जिले में बनाए जा रहे फर्जी प्रकरणों और फर्जी गिरफ्तारी की गूंज भारत की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है, जहां मिश्रा चेम्बर की ओर से पेश याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने थाना तमनार में आशुतोष वहिदार के विरुद्ध दर्ज आपराधिक प्रकरण में उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दिया है एवं पूरे मामले में छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग से जवाब तलब किया है।

तमनार निवासी आशुतोष वहिदार और सिविल लाइन रायगढ़ निवासी सरदार महेन्द्र पाल ने उद्योगपति राकेश जिन्दल के खिलाफ दस्तावेजी प्रमाण पेश करते हुए पुलिस अधीक्षक रायगढ़ सहित प्रदेश के शीर्ष पुलिस अधिकारियों के समक्ष रिपोर्ट किया था कि वर्ष 1995 में मर चुके दौलत सिंह के नाम पर नकली आदमी खड़ा करके राकेश जिन्दल ने वर्ष 2001 में नकली आदमी को दौलत सिंह बना कर और नकली आदमी का फोटो चिपका कर व हस्ताक्षर करा कर असली दौलत सिंह की असली जमीन की रजिस्ट्री जिन्दल कंपनी के नाम पर करा लिया एवं मरे हुए आदमी की पूरी जमीन हड़प लिया है । जब आशुतोष वहिदार और सरदार महेन्द्र पाल ने उद्योगपति राकेश जिन्दल के विरुद्ध रिपोर्ट कर उसकी गिरफ्तारी की मांग किया, तो राकेश जिन्दल को गिरफ्तार करने के बजाए रिपोर्टकर्ता आशुतोष वहिदार और सरदार महेन्द्र पाल के विरुद्ध अपराध दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया, जिसमें इन दोनों की जमानत होने के बाद आशुतोष वहिदार के विरुद्ध एक के बाद एक अनेकों मामले पुलिस थाना तमनार में दर्ज कर लिये गए ताकि भविष्य में कोई भी आदमी जिन्दल कंपनी के अत्याचार के खिलाफ आवाज न उठा सके ।


तमनार की पुलिस द्वारा आशुतोष वहिदार के विरुद्ध अनेक मामले बना कर उसे अभ्यस्त अपराधी के रूप में उसे दर्शाया जाने लगा एवं उसे गिरफ्तार करने के लिये छापेमारी की जाने लगी, जिससे हताश और निराश होकर उसने अशोक कुमार-आशीष कुमार मिश्रा चेम्बर के मार्फत सुप्रीम कोर्ट में क्रीमनल एस.एल.पी. पेश कराया और तमनार थाना की पुलिस के अत्याचार से निजात दिलाने की प्रार्थना की।
सुप्रीम कोर्ट में आशुतोष वहिदार की ओर से पूरे प्रमाण पेष किये गए कि उद्योगपति राकेश जिन्दल के विरुद्ध जब से उसने और उसकी माता ने शिकायत किया है तब से उसके विरुद्ध तमनार के थाना में फर्जी मामले बनने का सिलसिला ही नहीं रूक रहा है जबकि उक्त समस्त मामले फर्जी और बेबुनियाद हैं ।


रायगढ़ जिले की पुलिस के फर्जी मामले की गूंज सुप्रीम कोर्ट में उठने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पूरे प्रकरण का अध्ययन करने और कागजातों को देखने के बाद 2 जनवरी को आशुतोष वहिदार की गिरफ्तारी पर रोक लगा दिया और छत्तीसगढ़ सरकार के गृह सचिव को नोटिस जारी कर मार्च माह तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश पुलिसिया अत्याचार से प्रताड़ित याचिका कर्ता के लिये एक ओर जहां संजीवनी बूटी है, वहीं दूसरी ओर उन लोगों के प्रति एक प्रेरणा है, जो जिला पुलिस के फर्जी मामलों की लगातार मार झेल रहे हैं ।
मिश्रा चेम्बर के एडवोकेट अशोक कुमार मिश्रा-आशीष कुमार मिश्रा व प्रवीण त्रिपाठी ने सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को सत्य और न्याय की जीत के रूप में परिभाषित किया है।

WhatsApp Image 2024-01-20 at 23.42.49_7da1af9d
previous arrow
next arrow

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!
BREAKING