
जशपुर/ 08 जून. (रमेश शर्मा)
जशपुर वन मंडल में गर्मी का मौसम के दौरान जंगलों में आग की घटना से बड़ी संख्या में पेड़ पौधों का नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए वन विभाग इस वर्ष महुआ और चिरौंजी वनोपज के 10- 10 पौधे रोपने की तैयारी शुरू कर दी है.
जशपुर वन मंडल में तेन्दूपत्ता के अलावा महुआ और चिरौंजी वनोपज गरीब परिवार के लोगों के लिए जीवन यापन में बहुत बड़ा सहारा है. इस वनोपज का संग्रहण करने वाले ग्रामीणों को स्थानीय बाजार में काफी उंचे दाम मिल जाने से वे भी इन वनोपज का संग्रहण कार्य में अधिक रुचि लेते हैं.

जशपुर वन मंडल में तपकरा वन परिक्षेत्र की नर्सरी में 50 हजार से अधिक चिरौंजी और महुआ के पौधे तैयार करा लिए हैं.वन विभाग इन वनोपज का रोपण का कार्य में स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित की है. चिरौंजी और महुआ वनोपज का रोपण के बाद देखरेख में भी उन्हीं मजदूरों को शामिल किया जा रहा है. इसके साथ ही ग्रामीणों को प्रोत्साहित करने के लिए अन्य योजनाओं से भी लाभान्वित कराया जाऐगा.

चिरौंजी, महुआ वनोपज के पेड़ पौधों का विस्तार जरूरी
वनवासियों के हितों की रक्षा के कार्य में अग्रणी भूमिका निभाने वाली संस्था जनजातीय सुरक्षा मंच के जिला अध्यक्ष रोशन प्रताप सिंह का कहना है कि वन विभाग को यंहा हरियाली की सुरक्षा की खातिर काफी पहले ऐसी योजनाओं पर क्रियान्वयन शुरू कर देना चाहिए था. उन्होंने कहा कि यंहा प्रति वर्ष गर्मी की शुरूआत से जंगलों में आग की घटना बढ़ जाती हैं. इससे सैकड़ों हेक्टेयर वन क्षेत्र में हरियाली को नुकसान हो जाता है.रोशन प्रताप सिंह का कहना था कि चिरौंजी और महुआ वनोपज के पेड़ अब लुप्त होने की कगार पर आ गए हैं. इन पेड़ पौधों का विस्तार करने से गरीब परिवार के लोगों को अच्छा लाभ मिल सकेगा.

स्थानीय ग्रामीणों को मिलेगा महत्व
जशपुर वन मंडल अधिकारी जितेंद्र उपाध्यक्ष ने बताया कि यंहा तपकरा, पत्थलगांव, बगीचा, कुनकुरी मे चिरौंजी और महुआ वनोपज के पौधे रोपाई करने की योजना पर काम शुरू कर दिया गया है. वन कर्मचारियों को स्थानीय ग्रामीणों को प्राथमिकता देने के साथ उनके अनुभव का भी लाभ लेने के निर्देश दिए गए हैं. इससे वनोपज पौधों का जल्दी विस्तार हो सकेगा.





