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धर्मादा ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने लूट लिया सेठ किरोड़ीमल को..संपत्ति के दुरुपयोग के नाम पर हो चुकी है एफआईआर..ट्रस्ट पर अधिकार के बावजूद भी प्रशासन का मौन..मजबूरी या फिर बात कुछ और..?

**रायगढ़..* :- *धर्म और समाजसेवा के नाम पर सेठ किरोड़ीमल द्वारा बनाई गई करोड़ों की संपत्ति की बीते कई सालों से लूटखसोट मची हुई है।किराए के नाम पर मामूली किरायानामा दिखाकर करोड़ों रुपए की आय ट्रस्ट से जुड़े कतिपय लोग प्रतिमाह अर्जित कर रहे हैं।आरोप है कि, इस आय का ट्रस्ट के लेखा रजिस्टर या संबंधित रजिस्टरों पर कोई उल्लेख नहीं है। हर माह ट्रस्ट की संपत्तियों से अर्जित होने वाली आय का उपयोग भी किस जगह किया जा रहा है,इसका उल्लेख भी जानकारों के मुताबिक कहीं दर्ज नहीं किया गया है*

*अगर ट्रस्ट के करोड़ों की संपत्ति की बात की जाए तो इन संपत्तियों की लूट लगातार जारी है।बता दें कि, इन संपत्तियों के दुरुपयोग किए जाने को लेकर रमेश मोड़ा सहित कई लोगों पर कोतवाली में एफआईआर भी दर्ज किया जा चुका है।लेकिन इसमें अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है।बहरहाल अब तक ट्रस्ट की संपत्तियों की लूट लगातार जारी है।अभी ताजा मामला स्टेशन चौक में स्थित ट्रस्ट की एक संपत्ति का है जिसमें कहा जा रहा है कि, बरसों से काबिज एक किराएदार ने 1 करोड़ 31 लाख में इस संपत्ति का सौदा एक महिला से किया है।जिसमें सिर्फ किराएदार का नाम बदलने के एवज में 35 लाख की डील कथिततौर पर की गई है।इस इस पूरी डील से प्रशासन पूरी तरह से अंजान है।जबकि ट्रस्ट पर प्रशासन का पूरा अधिकार है।ट्रस्ट की समस्त गतिविधियों की जानकारी प्रशासन को होनी चाहिए।लेकिन ट्रस्ट के पदाधिकारियों द्वारा ट्रस्ट से जुड़े निर्णय प्रशासन को अंधेरे में रखकर असंवैधानिक तरीके से लिए जा रहे हैं।*

*एफआईआर के बाद भी ट्रस्ट की संपत्तियों की जांच अब तक क्यों नहीं..*

*बता दें कि,हरियाणा के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने ट्रस्ट के अध्यक्ष रमेश मोड़ा पर गंभीर आरोप लगाया था।और कोतवाली में बकायदा एफआईआर भी कराया था।उनका आरोप था कि, भिवानी हरियाणा में सेठ किरोड़ीमल धर्मादा ट्रस्ट की संपत्ति को रमेश मोड़ा और अन्य ने फर्जी तरीके से ट्रस्टी बनाकर षडयंत्र पूर्वक हस्तांतरण किया है,और उस संपत्ति से अर्जित आय का उपयोग निजी हित में कर रहे हैं।यहां यह बताना भी जरूरी होगा कि, रायगढ़ में भी करोड़ों की ट्रस्ट की संपत्ति है।जिसका सामाजिक कार्य की जगह या तो उसका निजी उपयोग हो रहा है या फिर किराये में देकर भाड़ा वसूला जा रहा है।कुल मिलाकर ट्रस्ट की संपत्तियों का बाजारीकरण करके उसका व्यावसायिक उपयोग पदाधिकारियों के द्वारा किया जा रहा है।जानकारी के मुताबिक किराए में दी गई संपत्तियों की पहले पगड़ी के रूप में मोटी रकम वसूली गई है फिर हर माह का किराया तय किया गया है।बताया जा रहा है कि इन संपत्तियों से वर्तमान दर पर किराया लिया जा रहा है लेकिन, लेखा रजिस्टर पर बहुत ही कम किराया दर्शाया गया है।कुल मिलाकर प्रशासन को ट्रस्ट की संपत्तियों के साथ साथ ट्रस्ट के दस्तावेजों की भी जांच कर पारदर्शी तरीके से ट्रस्ट की तमाम गतिविधियों को सार्वजनिक करना होगा*

*धर्मादा ट्रस्ट की संपत्तियों के उपयोग और किराए की आय का हिसाब सार्वजनिक क्यों नहीं?*

*धर्मादा ट्रस्ट की संपत्तियों के कथित निजी उपयोग और उनसे होने वाली किराए की आय को लेकर सामने आई शिकायत तथा FIR के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि, मामले की जांच आखिर किस स्तर तक पहुंची ? यदि ट्रस्ट की संपत्तियों के उपयोग किराए की वसूली अथवा प्रबंधन में अनियमितता की शिकायत दर्ज हुई है तो, संबंधित अभिलेखों की जांच, संपत्तियों का भौतिक सत्यापन और आय व्यय का मिलान क्यों नहीं दिखाई दे रहा है ?*

*मामले को गहराई से देखा जाय तो ऐसे बिंदु सामने आते हैं जिनकी निष्पक्ष जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। सबसे पहले यह पता लगाया जाना जरूरी है कि,ट्रस्ट के नाम पर कुल कितनी अचल संपत्तियां दर्ज है? उनमें से कितनी संपत्तियां किराए पर दी गई है? और किन व्यक्तियों अथवा संस्थाओं द्वारा उनका उपयोग किया जा रहा है|*

*दूसरा महत्वपूर्ण सवाल किराए की आय जुड़ा है। प्रत्येक संपत्ति से निर्धारित किराया कितना है? वास्तविक रूप से कितना किराया प्राप्त हुआ? किराए की राशि किस बैंक खाते में जमा हुई? और ट्रस्ट की लेखा पुस्तकों में उसका कितना उल्लेख किया गया? इन सभी बिंदुओं का दस्तावे से मिलान किया जाना आवश्यक है*

*सबसे अहम सवाल*

*ट्रस्ट की सभी संपत्तियों की अद्द्यतन सूची क्या है? प्रत्येक संपत्ति का वर्तमान उपयोग कौन कर रहा है? संपत्तियों का किराया निर्धारित करने का आधार क्या है? क्या सभी किराएदारों के साथ लिखित किरायानामा है? निर्धारित किराए और वास्तविक जमा राशि में कोई अंतर है या नहीं? पिछले वर्षों की किराए की आय बैंक खातों एवं कैश बुक में दर्ज है या नहीं? क्या ट्रस्ट की संपत्तियों का किसी पदाधिकारी उनके रिश्तेदार अथवा संबंधित व्यक्ति द्वारा प्रत्यक्ष प्रत्यक्ष प्रयोग किया जा रहा है ? FIR के बाद संपत्तियों का भौतिक सत्यापन कराया गया है या नहीं? ट्रस्ट के ऑडिट में संपत्तियों और किराए की आय का उल्लेख किस प्रकार किया गया है ? यदि अनियमितता की शिकायत गंभीर थी तो अब तक किसी जिम्मेदार व्यक्ति के विरुद्ध कार्यवाही क्यों नहीं हुई ?*

*दस्तावेजों से खुल सकता है पूरा मामला*

*इस प्रकरण में केवल आरोप प्रत्यारोप के बजाय रजिस्ट्री दस्तावेज,ट्रस्ट की संपत्ति,रजिस्टर,किरायानामा, किराया रसीद, बैंक स्टेटमेंट, कैश बुक, लेजर, और ऑडिट रिपोर्ट, ट्रस्ट की बैठक की कार्यवाही और FIR से संबंधित जांच दस्तावेजों का मिलान किया जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।*

*विशेष रूप से कितना किराया मिलना चाहिए था बनाम वास्तव में कितना जमा हुआ” का तुलनात्मक हिसाब इस मामले की जांच में महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है*

*अब जवाबदेही तय करने की जरूरत*

*ट्रस्ट की संपत्ति किसी व्यक्ति के निजी संपत्ति नहीं बल्कि निर्धारित ट्रस्ट उद्देश्य के लिए रखी गई संपत्ति होती है। इसलिए यदि संपत्ति के निजी उपयोग तथा आय में अनियमितता की शिकायत है तो, संबंधित प्राधिकरण को केवल एफआईआर दर्ज होने तक सीमित ना रहकर पूरे मामले की दस्तावेज और वित्तीत जांच करानी चाहिए**अब सवाल यह है कि,FIR के बाद जांच की प्रगति क्या है? ट्रस्ट की संपत्तियों का सत्यापन कब हुआ? किराए की वास्तविक आय कितनी है? और यदि कोई आर्थिक अनियमित सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी?*

*इन सवालों के जवाब सामने आने पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि, शिकायत केवल आरोप है। या इसके पीछे वास्तव में कोई गंभीर वित्तीय एवं संपत्ति संबंधी अनियमितता हुई है ,जिसे सांठगांठ करके दबाया और छिपाया जा रहा है*

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