
रायगढ़..धर्मार्थ और सेवार्थ के लिए सेठ किरोड़ीमल द्वारा बनाई गई संपत्ति का बीते कुछ बरसों से व्यवसायीकरण शुरू हो चुका है।खबरों की माने तो इस धर्मादा ट्रस्ट से ही जुड़े कतिपय पदाधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है।कतिपय ट्रस्टी ही धर्मादा ट्रस्ट की संपत्ति को कथिततौर पर किराएनामे के नाम पर करोड़ों में बेचने का काम कर रहे हैं।एक अनुमान के मुताबिक शहर में सेठ किरोड़ीमल की 500 करोड़ से भी ज्यादा की संपत्ति है जिसे उन्होंने सेवा के उद्देश्य से बनवाया था।किंतु इसमें से ज्यादातर किरोड़ीमल ट्रस्ट की संपत्ति ट्रस्टियों के द्वारा ही बेच दी गई है।ताजा मामला स्टेशन रोड की एक संपत्ति का है।जानकारी मिल रही है कि इस संपत्ति को भी किराएदार का नाम बदलकर करोड़ों रुपये में एक महिला को बेच दिया गया है।तीन महीने पहले ही ट्रस्ट की इस बेशकीमती संपत्ति की डील 1 करोड़ 31 लाख रुपए में कर दी गई है।जिसमें कब्जा छोड़ने ,नए किरायेदार के नाम ट्रांसफर के लिए लेन देन किया गया है।जिसमें से 35 लाख रुपए नाम ट्रांसफर के लिए लिये गए हैं। उल्लेखनीय है कि अगर इस संपत्ति के किराएदार बदलने के नाम पर अगर इतनी बड़ी रकम (1 करोड़ 31 लाख)की डील हुई है तो ट्रस्ट के खाते में कितनी रकम आई,क्या ट्रस्ट की रसीद काटी गई।क्या पूरी रकम ट्रस्ट के बैंक खाते में जमा की गई।क्या इस पूरे लेन देन का लेखा जोखा ट्रस्ट के पुस्तक में दर्ज है।क्या ट्रस्ट की कार्यकारिणी ने इसकी अनुमति दी।और सबसे बड़ा सवाल तो यह भी खड़ा होता है कि ट्रस्ट की संपत्ति को दूसरे किराएदार को हस्तांतरित करने के लिए कलेक्टर या एसडीएम की अनुमति ली गई है या फिर नहीं।बहरहाल इन तमाम सवालों के जवाब इस धर्मादा ट्रस्ट के तथाकथित पदाधिकारियों को देने होंगे।इधर जिला प्रशासन को भी करोड़ों की इस तथाकथित डील का संज्ञान लेना होगा क्योंकि इस डील में ट्रस्टियों की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है।



