
*रायगढ़:-* मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होना कांग्रेस की घोर लापरवाही और चुनावी प्रक्रिया के प्रति उसकी असंवेदनशीलता का प्रमाण है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष पूनम पटेल सोलंकी ने कहा कि अपनी गलती छिपाने के लिए कांग्रेस द्वारा चुनाव आयोग पर सवाल उठाना पूरी तरह अनुचित और दुर्भाग्यपूर्ण है।पूनम पटेल सोलंकी ने कहा कि जिस पार्टी को अपने प्रत्याशी का नामांकन पत्र विधिसम्मत तरीके से भरवाने के लिए सक्षम कानूनी सलाह तक उपलब्ध नहीं हो पाई,वह आज अपनी विफलता का ठीकरा चुनाव आयोग पर फोड़ने का प्रयास कर रही है।कांग्रेस को घड़ियाली आंसू बहाना बंद कर आत्ममंथन करना चाहिए।उन्होंने कहा कि यदि नामांकन पत्र में आवश्यक तथ्यों को छिपाया गया या अधूरी जानकारी प्रस्तुत की गई,तो इसके लिए चुनाव आयोग नहीं बल्कि उम्मीदवार और उसे मैदान में उतारने वाली पार्टी जिम्मेदार है।चुनाव आयोग ने नियमों और कानून के तहत अपना दायित्व निभाया है। लोकतंत्र में सभी के लिए समान नियम हैं और किसी भी राजनीतिक दल को विशेष छूट नहीं मिल सकती।पूनम पटेल सोलंकी ने कहा कि कांग्रेस की राजनीति अब केवल आरोप-प्रत्यारोप और संस्थाओं को बदनाम करने तक सीमित रह गई है।जब निर्णय उनके पक्ष में आता है तो संस्थाएं निष्पक्ष दिखाई देती हैं,लेकिन जब नियमों के आधार पर कार्रवाई होती है तो वही संस्थाएं कांग्रेस को कठघरे में नजर आने लगती हैं।यह कांग्रेस के दोहरे चरित्र को उजागर करता है।उन्होंने कहा कि गलत जानकारी के सहारे चुनाव लड़ने की मंशा रखने वाली कांग्रेस को दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। जनता सब देख रही है और समझ रही है कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक विफलताओं को छिपाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने का अभियान चला रही है।पूनम पटेल सोलंकी ने कहा कि यह घटना कांग्रेस की संगठनात्मक कमजोरी, नेतृत्वहीनता और चुनावी गंभीरता के अभाव को उजागर करती है।लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोपरि है तथा जो दल स्वयं इन मूल्यों का पालन नहीं कर पाता,उसे दूसरों को उपदेश देने का कोई अधिकार नहीं है।जारीकर्ता:पूनम पटेल सोलंकीपूर्व नेता प्रतिपक्ष



